Ad

natural farming portal

प्राकृतिक खेती की महत्ता एवं इसके क्या-क्या फायदे हैं

प्राकृतिक खेती की महत्ता एवं इसके क्या-क्या फायदे हैं

प्राकृतिक खेती की जानकारी के लिए भारत सरकार द्वारा एक पोर्टल लॉन्च किया गया है। इस पोर्टल पर प्राकृतिक खेती से जुड़ी हर तरह की जानकारियां मिल जाऐंगी। भारत में प्राकृतिक खेती का प्रचलन निरंतर बढ़ता ही जा रहा है। इस खेती में किसान किसी रसायन का उपयोग नहीं करते हैं। यह खेती बड़े स्तर पर ऑन-फार्म बायोमास रीसाइक्लिंग पर आधारित है, जिसमें बायोमास मल्चिंग, गाय के गोबर, मूत्र के उपयोग पर विशेष जोर दिया जाता है। मृदा की उर्वरता को बनाए रखने के लिए नीम से निर्मित जैविक उर्वरकों का स्प्रे किया जाता है।

प्राकृतिक खेती के क्या-क्या फायदे हैं

प्राकृतिक खेती का प्रमुख लक्ष्य मिट्टी की गुणवत्ता को प्रभावित किए बिना फसल के उत्पादन को शानदार करना है। यह फसलों में विविधता को बनाए रखना, प्राकृतिक संसाधनों का सही इस्तेमाल करना,
जैविक खाद और एक बेहतर खेती के वातावरण को प्रोत्साहन देता है। प्राकृतिक खेती एक जैव विविधता के साथ कार्य करती है। यह मिट्टी की जैविक गतिविधि को बढ़ाने के साथ-साथ खाद्य पैदावार को भी प्रोत्साहन देती है।

ये भी पढ़ें:
प्राकृतिक खेती से किसानों को होगा फायदा, जल्द ही देश के किसान होंगे मालामाल

प्राकृतिक खेती से पैदावार में सुधार आता है

प्राकृतिक खेती में उत्पादन पारंपरिक खेती के मुकाबले में काफी अच्छा होता है। इससे किसानों का मुनाफा भी काफी ज्यादा बढ़ता है। साथ ही, इससे उनकी आर्थिक स्थिति भी काफी बेहतर होती है। विगत कई वर्षों में परंपरागत कृषि करने वाले किसान इस प्राकृतिक खेती की ओर ज्यादा आकर्षित हुए हैं। इसके अतिरिक्त प्राकृतिक खेती मृदा संरक्षण, बेहतर कृषि विविधता तथा वातावरण में होने वाले कार्बन और नाइट्रोजन पदचिह्नों की कमी में भी अहम योगदान देती है।

प्राकृतिक खेती में कम लागत से अधिक उपज मिलती है

प्राकृतिक खेती का प्रमुख उद्देश्य किसानों को ऑन-फार्म, प्राकृतिक एवं घरेलू संसाधनों का इस्तेमाल कर बेहतरीन पैदावार करना है। इस विधि में किसानों की लागत काफी ज्यादा कम होती है। प्राकृतिक खेती का सबसे तात्कालिक प्रभाव मृदा के स्तर पर पड़ता है। रोगाणुओं एवं केंचुओं का प्राकृतिक कृषि पर एक सकारात्मक प्रभाव पड़ता हैं। रसायन मुक्त कृषि करने से मृदा के स्वास्थ्य पर काफी गहरा असर पड़ता है। साथ ही, यह फसलीय पैदावार में बेहतरीन योगदान देती है।

ये भी पढ़ें:
कम उर्वरा शक्ति से बेहतर उत्पादन की तरफ बढ़ती हमारी मिट्टी

प्राकृतिक खेती के लिए पोर्टल जारी किया है

भारत सरकार द्वारा देश में प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन देने के लिए एक वेबसाइट http://naturalfarming.dac.gov.in/ की शुरुआत की है। इस वेबसाइट पर प्राकृतिक खेती से जुड़ी हर तरह की जानकारियां मिल जाती हैं। इसके अतिरिक्त सरकार द्वारा प्राकृतिक खेती के लिए उठाए जा रहे समस्त कदमों के विषय में बड़ी आसानी से जानकारी मिल जाएगी। इस पोर्टल को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा विकसित किया गया है।
प्राकृतिक खेती से किसान, फसल और पर्यावरण पर होने वाले शानदार फायदे

प्राकृतिक खेती से किसान, फसल और पर्यावरण पर होने वाले शानदार फायदे

प्राकृतिक खेती फसलों की पैदावार एवं किसानों की उन्नति के लिए बेहद सही साबित होती जा रही है। इससे फसलों की पैदावार में तो वृद्धि होती ही है। इसके साथ-साथ यह पर्यावरण के दृष्टिकोण से भी अत्यंत लाभकारी है। आज के दौर में कृषकों के मध्य प्राकृतिक खेती का प्रचलन निरंतर बढ़ता ही जा रहा है। क्योंकि, इस खेती में भारत के कृषकों को ज्यादा फायदा हांसिल होता है।  आपकी जानकारी के लिए बतादें, कि पर्यावरण के दृष्टिकोण से भी प्राकृतिक खेती करना बेहद फायदेमंद है। इसमें किसी भी प्रकार के रसायन का उपयोग नहीं किया जाता है। दरअसल, प्राकृतिक खेती में सर्वाधिक गाय के गोबर,मूत्र और बायोमास मल्चिंग के इस्तेमाल पर ज्यादा बल दिया जाता है। प्राकृतिक खेती/ Prakritik Kheti को प्रोत्साहन देने के लिए भारत सरकार भी वक्त-वक्त पर महत्वपूर्ण कदम उठाती रहती है। इससे कृषकों की आमदनी बढ़ाने के साथ-साथ फसल पैदावार में भी वृद्धि हो सके।

प्राकृतिक खेती के क्या-क्या लाभ हैं ?

प्राकृतिक खेती करने से भूमिगत जलस्तर में बढ़ोतरी होती है। इससे मृदा, खाद्य पदार्थ एवं भूमि में जल के माध्यम से होने वाले प्रदूषण में गिरावट आती है। खाद तैयार करने में कचरे का इस्तेमाल करने से बीमारियों में कमी आती है। फसल पैदावार की लागत में कमी और आमदनी में बढ़ोतरी होती है।  ये भी पढ़ें: प्राकृतिक खेती से किसानों को होगा फायदा, जल्द ही देश के किसान होंगे मालामाल

प्राकृतिक खेती का प्रमुख मकसद क्या है ?

खेती की लागत कम करके ज्यादा मुनाफा हांसिल करना। मृदा की उर्वरा शक्ति को बढ़ाना। रासायनिक खाद और कीटनाशकों के इस्तेमाल में कमी लाना। कम पानी सिंचाई से अधिक उत्पादन लेना। 

प्राकृतिक खेती के प्रमुख घटक इस प्रकार हैं ?

  • जीवामृत
  • बीजामृत
  • घनजीवामृत
  • आच्छादन

सरकार की तरफ से प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन दिया जा रहा है 

किसानों को प्राकृतिक खेती की दिशा में प्रोत्साहित करने के लिए भारत सरकार ने प्राकृतिक खेती के लिए वेबसाइट https://naturalfarming.dac.gov.in/ भी निर्मित की हुई है, जिसमें प्राकृतिक खेती से संबंधित समस्त जानकारी उपलब्ध है। इससे कृषकों को इस खेती के लिए कहीं और भटकना पड़े। साथ ही, किसानों को इस पोर्टल के जरिए सरकार की ओर से खड़े किए गए महत्वपूर्ण कदम के बारे में शीघ्र अपडेट मिल सकें। बतादें, कि प्राकृतिक खेती का यह पोर्टल केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा तैयार किया गया है।